Silver Rate – बाजार में चांदी की कीमतों में लगातार हो रही तेजी ने निवेशकों और आम लोगों दोनों को हैरान कर दिया है। पिछले कुछ महीनों में जहां सोने की कीमतों में स्थिरता देखने को मिली, वहीं चांदी ने रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयों को छू लिया है। विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग, औद्योगिक उपयोग में तेजी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव के कारण चांदी की कीमतों में यह उछाल देखने को मिल रहा है। भारत में चांदी की कीमतें ₹200000 के स्तर के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और भी मजबूत तेजी देखने को मिल सकती है। इससे निवेशकों में उत्साह बढ़ा है, जबकि उपभोक्ता ऊंची कीमतों से चिंतित भी हैं।

चांदी की बढ़ती कीमतों के पीछे मुख्य कारण
चांदी की कीमतों में तेजी के कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियाँ सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं। वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर महंगाई दर में वृद्धि और आर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, जिनमें चांदी एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रही है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक और सोलर उद्योग में चांदी की भारी मांग ने भी इसकी कीमतों को ऊपर धकेलने में अहम योगदान दिया है।
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घरेलू बाजार में चांदी की रिकॉर्ड तेजी का असर
चांदी के ₹200000 के करीब पहुंचने से घरेलू बाजार पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। ज्वेलरी सेक्टर में खरीदारी में कमी आई है, क्योंकि उपभोक्ताओं के लिए ऊंची कीमतों पर खरीदारी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। वहीं निवेशक चांदी को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जिससे इसकी बाजार में मांग और बढ़ रही है। चांदी की तेजी ने उद्योगों पर भी प्रभाव डाला है, खासकर उन व्यवसायों पर जिनमें चांदी का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है। लागत बढ़ने से उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो कुछ क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
आने वाले दिनों में चांदी के दाम का पूर्वानुमान
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि चांदी की कीमतों में आने वाले दिनों में भी तेजी बरकरार रह सकती है। वैश्विक मांग में वृद्धि और आर्थिक अस्थिरता के कारण चांदी निवेशकों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बनती जा रही है। अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी बाजार पर बड़ा प्रभाव डाल रही है, जिससे कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो चांदी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर को पार कर सकती है।
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निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
चांदी में उछाल को देखते हुए निवेशकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सही समय है निवेश करने का। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार की स्थिति का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना चाहिए। चांदी की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत मानी जाती हैं, लेकिन वर्तमान ऊंचाई पर निवेश करते समय जोखिम भी बढ़ जाते हैं। इसलिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट अप्रोच अपनाना अधिक लाभकारी हो सकता है। जिन निवेशकों ने पहले से चांदी में निवेश किया है, उन्हें मुनाफावसूली के अवसर पर नजर बनाए रखनी चाहिए। वहीं नए निवेशकों को थोड़ा इंतजार कर संशोधित कीमतों पर बाजार में प्रवेश करना बेहतर माना जाता है।
