EPFO Pension Rule – अगर किसी व्यक्ति की दो पत्नियां हों तो किसे फैमिली पेंशन मिलेगी, यह सवाल अक्सर पेंशनधारकों और उनके परिवारों में भ्रम पैदा करता है। EPFO ने अपने नियमों में स्पष्ट कर दिया है कि फैमिली पेंशन किस आधार पर और किन लोगों को दी जाएगी। आमतौर पर यह पेंशन कर्मचारी की विधवा पत्नी को दी जाती है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति की दो पत्नियां हैं और दोनों विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं या दूसरा विवाह पहली पत्नी के रहते बिना उसकी सहमति के किया गया है, तो फैमिली पेंशन पर अधिकार को लेकर विवाद पैदा हो सकता है। EPFO के नियम बताते हैं कि कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त पत्नी को ही प्राथमिकता मिलेगी। वहीं, यदि दोनों विवाह कानूनी रूप से मान्य हैं या कोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त हैं, तो पेंशन दोनों में बांटी भी जा सकती है। इसी वजह से EPFO फैमिली पेंशन के लिए दस्तावेज़ों और वैधानिक प्रमाणों की जांच अनिवार्य करता है।

EPFO फैमिली पेंशन नियमों के अनुसार कौन है असली हकदार?
EPFO के फैमिली पेंशन नियमों के अनुसार यदि कर्मचारी की एक ही कानूनी पत्नी है, तो वही पेंशन की प्रथम हकदार मानी जाती है। लेकिन जिस स्थिति में कर्मचारी ने दूसरी शादी की है, तो अधिकार का निर्धारण कानूनी मान्यता के आधार पर किया जाता है। यदि दूसरी शादी पहली पत्नी की मृत्यु के बाद हुई है, तो दूसरी पत्नी को पूरा पेंशन अधिकार मिलता है। वहीं यदि कर्मचारी ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी की है और वह कानूनी रूप से वैध नहीं मानी जाती, तो EPFO फैमिली पेंशन का अधिकार पहली पत्नी को ही देता है। EPFO दस्तावेज़ों और विवाह की वैधता के प्रमाणों की जांच कर अंतिम निर्णय करता है। इसी कारण कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वैवाहिक रिकॉर्ड EPFO में अपडेट रखें।
दो पत्नियों की स्थिति में पेंशन बांटी भी जा सकती है
कुछ मामलों में EPFO दोनों पत्नियों को पेंशन बांटकर देने का प्रावधान भी लागू कर सकता है। यह तभी संभव है जब दोनों विवाह कानून के तहत वैध माने जाते हैं, या कोर्ट ने दोनों को पत्नी का दर्जा दिया हो। ऐसी स्थिति में पेंशन को समान रूप से बाँटने की व्यवस्था की जा सकती है। इसके लिए आवश्यक शर्त यह होती है कि कर्मचारी ने दोनों विवाहों की जानकारी EPFO रिकॉर्ड में जमा की हो या कानूनी दस्तावेज़ उपलब्ध हों। पेंशन बंटवारे का फैसला EPFO अधिकारी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों और स्थिति की सत्यता के आधार पर किया जाता है। वहीं, यदि कोई पत्नी नाबालिग बच्चों की देखभाल कर रही है, तो उसे प्राथमिकता भी दी जा सकती है।
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फैमिली पेंशन में बच्चों का अधिकार कैसे तय होता है?
EPFO नियमों के अनुसार पत्नी के बाद पेंशन का अधिकार बच्चों को दिया जाता है। यदि दो पत्नियों से बच्चे हैं, तो दोनों परिवारों के बच्चों को पेंशन का अधिकार समान रूप से मिल सकता है। प्रत्येक बच्चे को अधिकतम 25 वर्ष की आयु तक या विवाह होने तक पेंशन का लाभ मिल सकता है। यदि कोई बच्चा दिव्यांग है, तो उसे जीवनभर पेंशन मिल सकती है। बच्चों का अधिकार पत्नी के अधिकार से अलग माना जाता है और EPFO सुनिश्चित करता है कि दोनों परिवारों के बच्चों के साथ न्याय हो।
पेंशन के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया
फैमिली पेंशन का दावा करने के लिए पत्नी को विवाह प्रमाणपत्र, पहचान पत्र, बैंक अकाउंट विवरण और कर्मचारी से सम्बंधित EPF दस्तावेज़ जमा करने होते हैं। यदि दो पत्नियाँ दावा कर रही हैं, तो दोनों को अपने-अपने विवाह की वैधता साबित करनी जरूरी होती है। EPFO अधिकारी दस्तावेज़ों की जांच कर तय करते हैं कि पेंशन एक को मिलेगी या दोनों में बांटी जाएगी। पेंशन निर्धारण प्रक्रिया में किसी विवाद की स्थिति में मामला कोर्ट में भी जा सकता है।
